मौनी अमावस्या पर क्या करे | हिन्दू धर्म में मौनी अमावस्या का क्या महत्व |

माघ महीने की अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा जाता है। हिंदू धर्म ग्रन्थों के अनुसार इस दिन द्वापर युग का शुभारंभ हुआ था। इस बार यह पवित्र दिन (Mauni Amavasya 2020) 24 जनवरी को आ रहा है। 




मौनी अमावस्या की क्या कथा है ? (Mauni Amavasya ki katha)

प्राचीन काल में देव स्वामी नाम का एक ब्राह्मण था। उसकी पत्नी का नाम धनवती था। उस ब्राह्मण के 7 पुत्र और एक पुत्री थी। इस ब्राह्मण की पुत्री बहुत ही गुणवान थी।जब ब्राह्मण ने अपने सभी पुत्रों की शादी कर ली तो उसने अपने सबसे बड़े बेटे को अपनी बेटी का वर खोजने के लिए भेजा।

तब एक ब्राह्मण ने उसकी पुत्री की जन्मकुंडली देखी और बताया यह कन्या सात वचन होते ही विधवा हो जाएगी। तब ब्राह्मण ने पूछा कि क्या इसका कोई समाधान है? तब पंडित ने कहा सोमा की पूजा करने से इसका यह दोष समाप्त हो सकता है। पंडित ने बताया कि सोमा एक धोबिन है।

अगर आप उसे प्रसन्न कर सकते हैं तो विवाह से पहले उसे यहां बुला ले। तब देवस्वामी नाम का सबसे छोटा लड़का अपनी बहन को लेकर जा रहा था तो रास्ते में एक सागर था।सागर पार करने की चिंता में दोनों एक पेड़ के नीचे बैठ गए ।

उस पेड़ पर एक गिद्ध और उसका परिवार रहता था। उस समय घोंसले में गिद्ध नहीं था। गिद्ध के बच्चे भाई बहन को देख रहे थे।शाम को गिद्ध के बच्चों की मां आ गई।उन बच्चों ने अपनी मां को बताया कि नीचे दो लोग भूखे प्यासे बैठे हैं। जब तक भी कुछ खा नहीं लेते हम भी नहीं खाएंगे।

तब गिद्ध के बच्चों की मां उनके पास गई और बोली मैंने आपकी बात को जान लिया है।इस वन में जो भी मिलेगा मैं तुम्हारे खाने के लिए वही फल फूल ले आऊंगी।सुबह होते ही मैं तुम्हें सागर पार करवा दूंगी।प्रातकाल दोनों भाई बहन गिद्ध माता की सहायता से सागर के उस पार पहुंच गई।

मौनी अमावस्या पर क्या दान करें ?

रोजाना सुबह उठकर वे सोमा का घर साफ कर देते थे और लीप देते थे।सोमा ने अपनी बहू से पूछा कि हमारे घर को कौन साफ करता है ?सब ने कहा हमारे सिवाय और कौन बाहर से आकर इस काम को करेगा?

किंतु सोमा को उनकी बातों पर विश्वास नहीं हुआ।एक दिन उसने यह सब जानना चाहा वह पूरी रात जागती रही तब है यह सब कुछ देख कर जान गई सोमा ने दोनों भाई बहनों से बात की तब भाई ने अपनी बहन की सारी बात बता दी सोमा ने खुश होकर उसकी बहन के इस दोष को समाप्त करने का विश्वास दिलाया।

परंतु उसके भाई ने उन्हें अपने साथ चलने के लिए कहा। उनके बार-बार कहने पर सोमा उनके साथ चली गई जाते समय सोमा ने अपने बहुओं से कहा अगर मेरे या ना होने पर किसी की मृत्यु हो जाए तो उसका शरीर नष्ट मत करना इस तरह से सोमा हम दोनों भाई बहनों के साथ कांची पुरी आ गई।

दूसरे दिन गुणवती का विवाह निश्चित हो गया। तब सात वचन होते ही उसका पति मृत्यु को प्राप्त हो गया।सोमा ने तुरंत अपने पुण्य कर्मों के द्वारा उनकी बहन गुणवती को प्रदान कर दिया। शीघ्र ही उसका पति जीवित हो गया तमसो मा उन दोनों को आशीर्वाद देकर वहां से चली गई।

उधर शोमा के घर में गुणवती को पुण्य फल देने पर उनके बेटे जमाई और पति की मृत्यु हो गई।सोमा ने वह पुण्य फल संचित करने के लिए मार्ग में भगवान विष्णु की पूजा की सोमानी अपने फल प्राप्त करने के लिए रास्ते में ही पीपल के वृक्ष की भगवान विष्णु का पूजन करके 108 परिक्रमा की ।

इस तरह से जो भी व्यक्ति इस दिन दान व्रत पुण्य इत्यादि करता है उसे पुण्य की प्राप्ति होती है।


मौनी अमावस्या के शुभ योग के अवसर पर कौनसे काम नहीं करने चाहिए ? 

Mauni amavasya par kya kare ?

इस बार सोमवती व मौनी अमावस्या पर महोदय योग बन रहा है. यह दुर्लभ योग 71 वर्ष बाद कुंभ के दौरान बन रहा है.

चार फरवरी को मौनी अमावस्या है. माघ महीने की अमावस्या पर मौनी अमावस्या मनाई जाती है. प्रयागराज में चल रहे कुंभ का दूसरा शाही स्नान भी मौनी अमावस्या के दिन ही होगा. कुंभ मेले में सबसे ज्यादा महत्व है शाही स्नान का है. कुंभ का ये स्नान जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्ति दिलाता है. इस बार सोमवती व मौनी अमावस्या पर महोदय योग बन रहा है. यह दुर्लभ योग 71 वर्ष बाद कुंभ के दौरान बन रहा है. माना जा रहा है कि दूसरे शाही स्नान में संगम पर डुबकी लगाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगभग 4 करोड़ के आस-पास हो सकती है.

बन रहा है अद्भुत संयोग

अमावस्या के साथ-साथ सोमवती अमावस्या का अद्भुत संयोग बन रहा है. महोदय योग में गंगा, यमुना व अदृश्य सरस्वती के पावन त्रिवेणी तट पर स्नान करने, पूजा-पाठ करने और दान करने से अन्य दिनों में किए गए स्नान-दान से कई गुना अधिक पुण्य फल साधक को मिलता है. इस दिन दान का विशेष महत्व है. मौनी अमावस्या पर मौन रहकर डुबकी लगाने पर अनंत फल प्राप्त होता है.

अमावस्या के दिन नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बहुत ज्यादा होता है, इसलिए ईश्वर की भक्ति करना शुभ माना जाता. इस दिन पूजा, जप-तप बहुत ही शुभ होता है. मान्यता है कि इस दिन शुभ कार्य को नहीं करना चाहिए, अन्यथा लाभ की जगह हानि होने की संभावना ज्यादा रहती है. आज हम आपको बताएंगे कि अमावस्या के दिन कौन से ऐसे कार्य हैं जिन्हें भूलकर भी नहीं करना चाहिए.

क्लेश से रहे दूर

अमावस्या के दिन देवता पितरों का माना जाता है. घर में सुख-शांति और खुशी का माहौल पितरों की कृपा से बनती है. पितरों को खुश करने और कृपा पाने के लिए जहां तक हो सके अपने आप पर और काबू रखें किसी से बिना वजह गाली गलौज मारपीट न करें. कहीं भी किसी से क्लेश न करें. घर के माहौल को खुशनुमा बनाने के लिए पूजा-पाठ करें और अपने पितरों से आशीष लें.

सबका सम्मान करें

इस दिन गरीब या जरूरतमंद इंसान की मदद करें. मदद न भी कर सके तो, कम से कम उसका अपमान न करें. उसके दिल को न दुखाएं. गरीब आदमी के दिल को ठेस पहुंचाने से शनि और राहु-केतु रुष्ट हो जाते हैं और उनके प्रकोप से आपके जीवन में उथल-पुथल मच सकती है.

पेड़ों के नीचे जाने से बचे

मेहंदी, बरगद, इमली, पीपल के पेड़ो के नीचे नहीं जाना चाहिए. कहते हैं कि इस दिनों भूतों का पेड़ों पर वास रहता है और अमावस्या के दिन वो और भी शक्तिशाली हो जाते हैं. यह मनुष्य को वश में कर दुखी करते है. इसलिए इन पेड़ो के समीप जाने से भी इस दिन बचना चाहिए.

श्मशान भूमि में जाने से बचे


अमावस्या के दिन शमशान भूमि के आस-पास या अंदर जाने से हर वर्ग के लोगों को नहीं बचना चाहिए, क्योंकि इस दिन और रात में नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव बहुत ज्यादा होता है. जो हानि पहुंचाती हैं. ये शक्तियां मानसिक और शारीरिक दोनों तरह से परेशान करती हैं.

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