मुंशी प्रेमचंद का जीवन परिचय in short.

मुंशी प्रेमचंद का जीवन परिचय in short.

प्रेमचंद का जन्म ३१ जुलाई १८८० को वाराणसी के निकट लमही गाँव में एक कायस्थ परिवार में हुआ था। लमही, उत्तर प्रदेश राज्य के बनारस शहर के नजदीक ही लगभग चार मिल दूर स्थित हैं उनकी माता का नाम आनन्दी देवी था तथा पिता मुंशी अजायबराय लमही में डाकमुंशी थे।जीवन के अंतिम दिनों में वे गंभीर रूप से बीमार पड़े। उनका उपन्यास मंगलसूत्र पूरा नहीं हो सका और लम्बी बीमारी के बाद ८ अक्टूबर १९३६ (मुंशी प्रेमचंद जयंती) को उनका निधन हो गया। उनका अंतिम उपन्यास मंगल सूत्र उनके पुत्र अमृतराय ने पूरा किया।

मुंशी प्रेमचंद का वास्तविक नाम 'धनपत राय' था। पिता ने 'धनपतराय' नाम दिया था, तो चाचा प्यार से नवाबराय बुलाते थे। मुंशी प्रेमचंद 'उर्दू' से हिन्दी' लेखन में आए।उनकी 'सोजे वतन' (1909, जमाना प्रेस, कानपुर) कहानी-संग्रह की सभी प्रतियां तत्कालीन अंग्रेजी सरकार ने जब्त कर ली थीं।सरकार के कोपभाजन बनने से बचाने के लिए उर्दू अखबार 'जमाना' के संपादक मुंशी दयानारायण निगम ने नबावराय के स्थान पर 'प्रेमचंद' नाम से लिखना सुझाया। यह नाम इनको इतना पसंद आया कि 'नवाबराय' के स्थान पर 'प्रेमचंद' हो गए और 'प्रेमचंद' के नाम से लिखने लगे।



मुंशी प्रेमचंद के कितने पुत्र-पुत्री थे?

हिन्‍दी उपन्‍यास सम्राट प्रेमचन्‍द के तीन संतानें थी । दो पुत्र श्रीपतराय व अमृतराय तथा एक पुत्री जिसका नाम कमला देवी था ।

प्रेमचन्‍द के पुत्र अमृतराय की गणना भारत के प्रगतिशील साहित्‍यकारों में होती है । अमृतराय को उनकी कृति “कलम का सिपाही” पर वर्ष 1963 का साहित्‍य अकादमी पुरस्‍कार प्रदान किया गया । कलम का सिपाही, प्रेचन्‍द की जीवनी है । कहानियों के अलावा इन्‍होंने ललित निबन्‍धों की भी रचना की ।

मुशी प्रेमचन्‍द ने “हंस” नाम से हिन्‍दी की मासिक साहित्‍यिक पत्रिका की शुरूवात की । उनकी मृत्‍यु के पश्‍चात इस पत्रिका का सम्‍पादन अमृतराय द्वारा किया गया । अमृतराय ने प्रेमचन्‍द के अंतिम उपन्‍यास मंगलसूत्र को भी पूरा किया ।


मुंशी प्रेमचंद की कहानियाँ और उपन्यास

प्रेमचंद जी ने बहुत सारी रचनाएँ लिखी हैं। उनमें कई उपन्यास ,नाटक ,कहानियाँ हैं।


प्रेमचंद की प्रमुख कृतियाँ उपन्यास


गोदान

गोदान एक अद्भुत रचना है, समय से परे और सच्चाई के बहुत करीब!

ब्रिटिश काल में हो रही गरीब परिवारों की दुर्दशा और जीने के लिए उनके संघर्ष का इसमें बखूबी वर्णन किया गया है। उपन्यास के मुख्य पात्र होरी और धनिया हैं। भाषा इतनी सरल, विवरण इतना सहज और कहानी इतनी रुचिकर है कि आप इसे पूरा किए बिना नहीं रह पाएंगे।


मंगलसूत्र

अच्छी कहानियाँ कभी खत्म नहीं होती। मंगलसूत्र इसी बात का एक उदाहरण है। इसके शुरू के चार अध्याय पढ़ने में बहुत अच्छे हैं, पर उनमें पाठक यह पता नहीं लगा पाएँगे कि आखिर इस उपन्यास का नाम मंगलसूत्र क्यों रखा गया। और क्योंकि इन चार अध्यायों के बाद प्रेमचंद की मृत्यु हो गयी, अब शायद ही कोई समझ पाएगा कि कहानी का अगला मोड़ क्या था। पर हाँ, आपको अंदाजा लगाने की पूरी छूट है।

क्या देवकुमार वह बेची जा चुकी संपत्ति पाने कि कोशिश में अपनी ईमानदारी को ताक पर रख देंगे?

क्या उनका वकील बेटा वह जमीन वापस पा लेगा?

क्या पुष्पा केस लड़ने के लिए पैसे का इन्तजाम करने में संतकुमार की मदद करेगी?

साधुकुमार क्या करेगा?

तिब्बी का कहानी में आगे क्या रोल रहेगा?

और भी न जाने कितने सवाल कहानी पढ़ने के कई दिनों बाद तक आपको घेरे रहेंगे।



प्रेमाश्रम

प्रेमाश्रम परिवारों, राजनीति, स्वतंत्रता संग्राम और मूल्यों के इर्द-गिर्द घूमती है। जमींदारी और जायदाद के लोभ के कारण कथा के एक मुख्य पात्र प्रेमशंकर द्वारा गाँव वालों पर किए गए जुल्मों की कहानियाँ और अंत में लोगों को उससे छुटकारा मिलने का प्रसंग बहुत ही अच्छे ढंग से प्रस्तुत किए गए हैं।


गबन

गबन पराधीन भारत पर लिखा गया एक उपन्यास है, जो आज भी पहले जितना ही प्रासंगिक लगता है। ‘गबन’ का अर्थ होता है – हड़पना या घपलेबाजी करना। कहानी रामनाथ नाम के एक युवा के ऊपर लिखी गयी है जो अपनी पत्नी की महँगी मांगों को पूरा करने के लिए खुद को भयंकर आर्थिक संकट में डाल लेता है। इसमें आपको भारतीय परिवारों की मनोव्यथा और समाज के बारे में जानने को मिलेगा। गबन प्रेमचंद की सबसे अच्छी हिंदी कथाओं में गिनी जाती हैI तो, इसे पढ़ना मत भूलिए!


निर्मला

यह एक पंद्रह-वर्षीया लड़की निर्मला की कहानी है, जिसकी शादी उससे लगभग बीस साल बड़े व्यक्ति से कर दी जाती है। उपन्यास में प्रेमचंद दहेज और बाल विवाह जैसी कुरीतियों पर खासा प्रकाश डालते हैं। यह उन कुछ शुरुआती उपन्यासों में से एक है, जिसमें प्रेमचंद की लेखनी को धार मिलनी शुरू हुई थी और लोगों ने उन्हें पसंद करना शुरू किया था।


मुंशी प्रेमचंद की कहानी

प्रेमचंद जानते थे कि कलम में किसी भी दूसरी चीज से ज्यादा ताकत होती है और इसीलिए उन्होंने सामाजिक मुद्दों पर लोगों को जाग्रत करने या छोटे/मध्यम तबके की परेशानियों से उच्च वर्ग को वाकिफ कराने के लिए कहानियों का रास्ता चुना।

मैंने फिलहाल ही प्रेमचंद का 151 कहानियों का एक संग्रह पढ़कर खत्म किया है और सोच रही हूँ कि क्या कोई एक व्यक्ति इतनी सारी सफल रचनाएँ कर सकता है? क्या यह एक जीवन में संभव है? हालाँकि अभी भी उनकी सौ या उससे ज्यादा रचनाएँ ऐसी हैं जो मैंने नहीं पढ़ी हैं, पर अब मैं आपको उनकी दस सबसे अच्छी कहानियाँ कौन सी हैं, यह तो बता ही सकती हूँ। यह रही सूची – मुंशी प्रेमचंद की रचनाएँ Or मुंशी प्रेमचंद की 5 छोटी कहानियाँ. Or मुंशी प्रेमचंद की सबसे छोटी कहानी.

  1. ईदगाह
  2. दो बैलों की कथा
  3. बड़े भाईसाहब
  4. कफन
  5. पूस की रात
  6. नमक का दरोगा
  7. पंचपरमेश्वर
  8. बूढ़ी काकी
  9. ठाकुर का कुआँ
  10. बड़े घर की बेटी

यहाँ पर मुंशी प्रेमचंद का जीवन परिचय मेने बहोत ही काम सब्दो में समजने की कोशिस की है. 

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